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दिल्ली स्कूलों में RSS और स्वतंत्रता सेनानियों का पाठ: ‘राष्ट्रनीति’ से जागेगा नागरिक कर्तव्य, शिक्षा में नया अध्याय!

वीर सावरकर से मोदी तक, RSS की शताब्दी पर सामाजिक चेतना – क्या ये पाठ्यक्रम बदलेगा बच्चों की सोच? नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2025: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का रंग और गहरा होने जा रहा। शिक्...

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केंद्रीय संपादकीय डेस्क • रविवार, 12 अक्टूबर 2025 | 02:14 PM

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दिल्ली स्कूलों में RSS और स्वतंत्रता सेनानियों का पाठ: ‘राष्ट्रनीति’ से जागेगा नागरिक कर्तव्य, शिक्षा में नया अध्याय!
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वीर सावरकर से मोदी तक, RSS की शताब्दी पर सामाजिक चेतना – क्या ये पाठ्यक्रम बदलेगा बच्चों की सोच?

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2025: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का रंग और गहरा होने जा रहा। शिक्षा विभाग ने ‘राष्ट्रनीति’ नामक नया पाठ्यक्रम शुरू किया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान शामिल होगा। RSS अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा, और इस मौके पर बच्चों को संगठन की विचारधारा, स्वाधीनता संग्राम में भूमिका और सामाजिक कार्यों की कहानी पढ़ाई जाएगी। क्या ये पाठ्यक्रम बच्चों में देशभक्ति और नागरिक कर्तव्य की नई चिंगारी जगा देगा? आइए, इस ऐतिहासिक कदम की परतें खोलें, जहां शिक्षा, संस्कृति और सेवा का मेल हो रहा।

‘राष्ट्रनीति’ का मिशन: नागरिक कर्तव्य और सामाजिक चेतना

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, “राष्ट्रनीति पाठ्यक्रम का मकसद बच्चों में सामाजिक चेतना और नागरिक कर्तव्यों की समझ विकसित करना है।” इसमें RSS की स्थापना, विचारधारा और प्राकृतिक आपदाओं में स्वयंसेवकों की भूमिका को हाईलाइट किया जाएगा। बच्चों को सिखाया जाएगा कि सच्ची देशभक्ति अनुशासन और सेवा में है। एक शिक्षक बोले, “ये पाठ बच्चों को इतिहास से जोड़ेगा और जिम्मेदार नागरिक बनाएगा।” SCERT में शिक्षकों का ट्रेनिंग शुरू, लेकिन किन कक्षाओं में पढ़ाया जाएगा, ये तय होना बाकी।

स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान: सावरकर से बोस तक की कहानी

पाठ्यक्रम में वीर सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के योगदान पर विशेष फोकस। इन नेताओं की कहानियां बच्चों को प्रेरित करेंगी। RSS के सामाजिक कार्य – रक्तदान शिविर, बाढ़-भूकंप में राहत, कोविड महामारी में सहयोग – भी शामिल। एक अधिकारी बोले, “हम बच्चों को सिखाएंगे कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।” ये पाठ न सिर्फ इतिहास पढ़ाएगा, बल्कि भ्रांतियां भी दूर करेगा।

RSS का शताब्दी उत्सव: 1925 से अब तक का गौरवशाली सफर

1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने RSS की नींव रखी। पाठ्यक्रम में इसका इतिहास, सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर। पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी और PM नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं का RSS से जुड़ाव भी हाईलाइट। एक शिक्षक ने कहा, “ये बच्चों को दिखाएगा कि संगठन ने देश को कैसे मजबूत किया।” सोशल मीडिया पर #RSSShatabdi ट्रेंड, जहां लोग गर्व जता रहे।

सामाजिक कार्यों का गर्व: रक्तदान से कोविड राहत तक

RSS के स्वयंसेवकों ने केदारनाथ बाढ़, बिहार बाढ़ और कोविड जैसे संकटों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पाठ्यक्रम में इन कहानियों को शामिल कर बच्चों को सिखाया जाएगा कि संकट में दूसरों की मदद कैसे करें। रक्तदान, भोजन वितरण और राहत कार्यों की कहानियां प्रेरणा देंगी। एक अभिभावक बोले, “बच्चों को सेवा का पाठ पढ़ाना जरूरी है।” क्या ये समाज में नया बदलाव लाएगा?

भविष्य की राह: शिक्षा से राष्ट्र निर्माण

‘राष्ट्रनीति’ सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों में देशभक्ति और जिम्मेदारी का बीज बोने की कोशिश। शिक्षा निदेशालय ने शिक्षक पुस्तिकाएं तैयार कीं, और ट्रेनिंग तेज। लेकिन सवाल – क्या ये पाठ भ्रांतियों को खत्म करेगा? एक छात्र बोला, “हम इतिहास के नए पहलू जानेंगे।” ये कदम शिक्षा को नई दिशा देगा, लेकिन इसका असर समय बताएगा।

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