मुंबई में गणेश उत्सव 2026 की धूम: लालबाग के राजा के दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब।
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शनिवार, 19 सितंबर 2026 | 05:51 PM
गणेश उत्सव 2026 का पावन पर्व देशभर में असीम श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ शुरू हो गया है। सोमवार से शुरू हुए इस दस दिवसीय महाउत्सव में देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। महाराष्ट्र के मुंबई से लेकर तेलंगाना के हैदराबाद, मध्य प्रदेश के इंदौर, राजस्थान के जयपुर और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर तक हर जगह गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं ने अपने प्रिय विघ्नहर्ता का स्वागत करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है, जहां कहीं विशालकाय प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी हैं, तो कहीं सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया जा रहा है।
मुंबई और महाराष्ट्र: लालबाग के राजा से जीएसबी मंडल तक आस्था का महासंगम
महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। मुंबई के प्रसिद्ध 'लालबाग के राजा' के पंडाल में बप्पा के दर्शन के लिए प्रथम दिन से ही श्रद्धालुओं की किलोमीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। मंडल का यह 93वां वर्ष है और इस बार पूरा पंडाल भगवान शिव की दिव्य थीम पर तैयार किया गया है, जिसके केंद्र में एक विशालकाय त्रिशूल स्थापित है। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने हेतु व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
दक्षिण मुंबई के किंग्स सर्कल, माटुंगा में स्थित जीएसबी सेवा मंडल के महागणपति को मुंबई का 'सबसे अमीर गणपति' माना जाता है। वर्ष 2026 के इस पावन उत्सव में बप्पा की प्रतिमा को 66 किलोग्राम से अधिक सोने के आभूषणों और 335 किलोग्राम से अधिक चांदी से भव्य रूप से सजाया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से यहां 24 घंटे कड़े प्रबंध किए गए हैं। इसके अलावा, प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में भी प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस प्रकार के धार्मिक व सांस्कृतिक पर्वों एवं सामाजिक आयोजनों से देश की सांस्कृतिक अखंडता को नई मजबूती मिलती है।
हैदराबाद में 72 फीट के खैरताबाद गणेश और 'विकसित भारत 2047' की झलक
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में गणेशोत्सव का भव्य रूप देखने को मिल रहा है। शहर के प्रसिद्ध खैरताबाद में इस वर्ष भगवान गणेश की 72 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। प्रतिमा की नक्काशी और भव्यता देखते ही बनती है।
उप्पुगुडा में 50वीं सालगिरह पर विशेष थीम
हैदराबाद के उप्पुगुडा स्थित मल्लिकार्जुन नगर यूथ वेलफेयर एसोसिएशन ने गणेश चतुर्थी के अपने 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर एक ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' की राष्ट्रव्यापी अवधारणा पर आधारित पंडाल और गणेश प्रतिमा का निर्माण किया है। यह पंडाल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आने वाले दशकों में भारत की प्रगति और आत्मनिर्भरता का संदेश भी प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे राष्ट्रीय दृष्टि वाले प्रयासों से सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों की गरिमा और अधिक बढ़ जाती है।
इंदौर में पर्यावरण संदेश और 7 करोड़ के आभूषणों से सजे खजराना गणेश
मध्य प्रदेश की धार्मिक एवं व्यापारिक नगरी इंदौर में भी उत्सव की अनूठी छटा देखने को मिल रही है। इंदौर के तिलक नगर में पर्यावरण संरक्षण और जीव-दया का संदेश देने के लिए 3 टन प्राकृतिक मिट्टी से निर्मित 14 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा विराजित की गई है। इस पंडाल को पूरी तरह से प्रकृति और पशु कल्याण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सजाया गया है।
दूसरी ओर, इंदौर के ऐतिहासिक खजराना गणेश मंदिर में बप्पा को लगभग 7 करोड़ रुपये मूल्य के स्वर्ण आभूषण अर्पित किए गए हैं। उत्सव की शुरुआत से पूर्व रविवार को ब्रह्ममुहूर्त में भगवान को हीरे जड़ित दिव्य नेत्र धारण कराए गए। इसके साथ ही, गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर भगवान गणेश को सवा लाख मोदक का महाभोग भी लगाया गया। त्योहारों के मौसम में त्योहारों की मिठास बढ़ाने वाले विशेष उपहार पैकों और मिठाइयों का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है, जिससे देश भर के परिवारों में खुशियां बंटती हैं।
जयपुर, पटना और पश्चिम बंगाल: सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता
राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा महोत्सव और जन्मोत्सव पर विशेष दर्शन व्यवस्था लागू की गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालु सुबह 5:00 बजे से लेकर देर रात 11:40 बजे तक निर्बाध रूप से दर्शन कर सकेंगे।
पटना में मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल
बिहार की राजधानी पटना में इस बार तमिलनाडु के मदुरई स्थित प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर एक भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है। इस पंडाल के भीतर मुंबई के लालबाग के राजा की स्वरूप वाली साढ़े 5 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है।
दुर्गापुर में ट्रांसजेंडर समुदाय की सराहनीय पहल
सामाजिक समरसता की एक बेहद खूबसूरत मिसाल पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित श्यामपुर कॉलोनी में देखने को मिली। स्थानीय महिलाओं द्वारा आयोजित गणेश पूजा का औपचारिक उद्घाटन ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों द्वारा कराया गया। आयोजकों ने बताया कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना ही बप्पा की वास्तविक पूजा है। हमारे समाज में जिस प्रकार त्योहारों के दौरान सुगम आवागमन की सरकारी पहलों से आम नागरिकों को राहत मिलती है, ठीक उसी तरह सामाजिक समावेशिता भी पर्वों के आनंद को दोगुना कर देती है। कला और संस्कृति के ऐसे अनोखे संगम पर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों में भी विस्तृत चर्चाएं होती रही हैं।
सुरक्षा, यातायात और दर्शनार्थियों के लिए प्रशासनिक दिशा-निर्देश
गणेशोत्सव के दौरान उमड़ने वाली विशाल भीड़ को देखते हुए सभी राज्यों के पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं:
- सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी: प्रमुख पंडालों और मंदिरों के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
- यातायात डायवर्जन: भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है तथा श्रद्धालुओं के लिए समर्पित पार्किंग स्थल बनाए गए हैं।
- पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन: प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीओपी की मूर्तियों के स्थान पर मिट्टी से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दें और कृत्रिम कुंडों में ही विसर्जन करें।
निष्कर्ष
गणेश उत्सव 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और कलात्मक विविधता का महान जीवंत प्रतीक है। हैदराबाद की गगनचुंबी प्रतिमा से लेकर इंदौर के पर्यावरण-हितैषी बप्पा और दुर्गापुर की सामाजिक समरसता तक, यह उत्सव पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश से यही प्रार्थना है कि वे समस्त देशवासियों के जीवन से विघ्नों का नाश कर सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्रदान करें।
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