रेखा गुप्ता अंगदान: मुख्यमंत्री के संकल्प से जगी आस, जानिए एक दानदाता कितने लोगों को दे सकता है नया जीवन
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 | 05:24 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के पावन अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने अंग और ऊतक दान (Organ and Tissue Donation) करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया है। रेखा गुप्ता अंगदान के इस पावन फैसले ने देशभर में एक सकारात्मक संदेश दिया है और अंगदान की जीवनरक्षक क्षमता पर नया प्रकाश डाला है। हाल ही में जनसेवा के विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच, जैसे कि कंगना रनौत ने रेखा गुप्ता संग मनाई तीज के दौरान महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया गया था, ठीक उसी तरह इस निर्णय ने भी स्वास्थ्य व नागरिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ब्रेन स्टेम मृत्यु (Brain Stem Death) की स्थिति में एक अकेला दानदाता 8 लोगों को प्रत्यक्ष जीवनदान दे सकता है और ऊतक दान के माध्यम से 50 से अधिक अन्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार कर सकता है।
एक दानदाता से आठ लोगों को जीवनदान: चिकित्सा विज्ञान का चमत्कार
जब किसी व्यक्ति को चिकित्सा दृष्टि से ब्रेन स्टेम मृत घोषित कर दिया जाता है, तब उसके महत्वपूर्ण अंगों को कृत्रिम सहायता से कुछ समय के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इस दौरान किए गए अंगदान से आठ अलग-अलग गंभीर मरीजों को नया जीवन प्राप्त हो सकता है। दिल्ली सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, जैसे दिल्ली में ₹2500 वाली योजना लागू की तर्ज पर, अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाना भी स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख लक्ष्य बन चुका है।
अंगों का वर्गीकरण और उनकी जीवनरक्षक क्षमता:
- लीवर (यकृत): लीवर में स्वयं को पुनर्जीवित (Regenerate) करने की एक अद्वितीय प्राकृतिक क्षमता होती है। सही चिकित्सीय परिस्थितियों में दान किए गए एक लीवर को दो हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है। इससे दो प्राप्तकर्ताओं—प्रायः एक वयस्क और एक बच्चे—को नया जीवन दिया जा सकता है।
- फेफड़े (Lungs): यदि दान किए गए दोनों फेफड़े पूर्णतः स्वस्थ और चिकित्सीय रूप से उपयुक्त पाए जाते हैं, तो उन्हें दो अलग-अलग गंभीर श्वसन रोगियों में ट्रांसप्लांट करके दो जानें बचाई जा सकती हैं।
- हृदय (Heart): दान किया गया स्वस्थ दिल किसी ऐसे मरीज को नई धड़कन और जीवन दे सकता है जो अंतिम चरण की गंभीर हृदय बीमारी या जानलेवा कार्डियक स्थिति से जूझ रहा हो।
- पैनक्रियाज (अग्न्याशय): गंभीर मधुमेह (Diabetes) या अग्न्याशय की अंतिम चरण की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पैनक्रियाज का ट्रांसप्लांट किया जाता है।
- आंत (Intestine): आंतों की विफलता या गंभीर आंतों की बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए आंत का ट्रांसप्लांट एक अत्यंत कारगर और जीवन रक्षक विकल्प साबित होता है।
ऊतक दान (Tissue Donation): 50 से अधिक लोगों का जीवन संवारने का जरिया
अंगों के दान के अलावा, रेखा गुप्ता अंगदान पहल इस बात पर भी जोर देती है कि मानव शरीर के ऊतक मृत्यु के बाद भी दर्जनों लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल सकते हैं। जिस प्रकार त्योहारों के सीजन में नागरिक सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है—उदाहरण के लिए रक्षाबंधन पर रेलवे का तोहफा और 14 स्पेशल ट्रेनें या फिर यातायात सुगमता के प्रयास—उसी प्रकार स्वास्थ्य क्षेत्र में ऊतक दान की उपलब्धता से मरीजों की राह आसान हो जाती है।
मुख्य दान योग्य ऊतक और उनके उपयोग:
1. कॉर्निया (आंखें): कॉर्निया दान से आंखों की दृष्टि खो चुके दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को पुनः देखने की शक्ति मिल सकती है। एक दाता के दो कॉर्निया दो अलग-अलग लोगों के जीवन में उजाला भरते हैं।
2. त्वचा (Skin): दान की गई त्वचा का उपयोग गंभीर रूप से जले हुए (Burn Patients) मरीजों और दुर्घटना पीड़ितों के इलाज में किया जाता है। यह त्वचा नए घावों को भरने और संक्रमण से बचाने के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत का काम करती है।
3. हड्डियां और हृदय वाल्व: हड्डियों के ऊतकों (Bone Tissues) का उपयोग कैंसर या गंभीर चोट के कारण क्षतिग्रस्त हुई हड्डियों के पुनर्निर्माण में होता है। इसके साथ ही दान किए गए हृदय के वाल्व (Heart Valves) उन छोटे बच्चों और वयस्कों की जान बचाते हैं जिनके दिल के वाल्व खराब हो चुके होते हैं। सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इस दिशा में सहयोग कर रही हैं; उदाहरण स्वरूप अखंड राजपूताना सेवा संघ के पदाधिकारियों का योगदान समाज में सेवा भाव की मिसाल पेश करता है।
जीवित अंगदान (Living Donation): जीवन रहते भी संभव है सहयोग
अंगदान केवल मृत्यु के बाद ही सीमित नहीं है। भारतीय कानून और चिकित्सीय दिशानिर्देशों के तहत एक स्वस्थ जीवित व्यक्ति भी अपने जीवनकाल में कुछ अंगों का दान कर सकता है:
- किडनी (वृक्क): एक सामान्य व्यक्ति केवल एक किडनी के सहारे भी पूर्ण रूप से स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकता है। इसलिए वह अपनी दूसरी किडनी किसी जरूरतमंद रिश्तेदार या मरीज को दान कर सकता है।
- लीवर का एक हिस्सा: चूंकि लीवर पुनः विकसित हो जाता है, इसलिए एक जीवित व्यक्ति अपने लीवर का एक हिस्सा दान कर सकता है, जो दाता और प्राप्तकर्ता दोनों के शरीर में कुछ ही महीनों में पूर्ण आकार में वापस बढ़ जाता है।
अक्सर देखा जाता है कि दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में लोग दैनंदिन समस्याओं से परेशान रहते हैं, जैसे जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन पर स्मार्ट कार्ड न मिलने की समस्या, लेकिन इन नागरिक चिंताओं के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना और अंगदान का संकल्प लेना समाज को एक नई दिशा देता है। जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर PM मोदी के भाषण से देश में नई ऊर्जा का संचार होता है, वैसे ही नेतृत्वकर्ताओं का अंगदान संकल्प समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है।
निष्कर्ष और पंजीकरण की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह साहसिक कदम देश के लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। यदि आप भी अंगदान का संकल्प लेना चाहते हैं, तो भारत सरकार के राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शपथ पत्र (Pledge Form) भर सकते हैं। आपका एक निर्णय भविष्य में कई परिवारों की खुशियों को लौटने में मददगार साबित हो सकता है।
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