श्रीराम मंदिर गोरक्षपीठ संतों का योगदान अतुलनीय: सीएम योगी बोले- राष्ट्र व धर्म के लिए समर्पित रहा पूज्य गुरुदेवों का जीवन
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 | 01:15 PM
श्रीराम मंदिर गोरक्षपीठ संतों का योगदान भारत के सांस्कृतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि रामलला के प्रकटीकरण से लेकर मुक्ति आंदोलन तक पीठ के पूज्य संतों ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और धर्म को समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री गोरखपुर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन बोल रहे थे।
राम मंदिर मुक्ति आंदोलन और गोरक्षपीठ की ऐतिहासिक भूमिका
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब अयोध्या में श्रीरामलला का प्रकटीकरण हुआ, उस समय ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज स्वयं वहां उपस्थित थे। इसके बाद गुलामी के ढांचे को हटाने और श्रीरामजन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए गठित 'श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति' का नेतृत्व राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने संभाला। गोरक्षपीठ के इन दोनों महापुरुषों ने न केवल संत समाज को एक मंच पर लाने का अभूतपूर्व कार्य किया, बल्कि समाज और राष्ट्र के अनुकूल चलते हुए लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
वर्तमान समय में जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण पूर्ण होकर दिव्य वैभव स्थापित हो चुका है, तब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। हाल ही में राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी अटूट आस्था इस बात का प्रमाण है कि पूज्य संतों का संकल्प आज साकार हो चुका है। हालांकि, मंदिर व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक सजगता भी दिखाई गई है और अयोध्या में सुरक्षा व पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु त्वरित कार्रवाई की जाती रही है।
'शिवत्व और स्थिरता ही जीवन में सफलता का मूल मंत्र': सीएम योगी
भगवान शिव और शिवभक्ति के गूढ़ दर्शन को समझाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "यदि हम शिवभक्त हैं तो हमें भगवान शंकर की तरह सम और विषम परिस्थितियों में एक समान तथा निश्छल रहना चाहिए। समाज की विसंगतियों के बीच से ही लोक कल्याण का मार्ग निकलता है। भगवान शिव ने विष पीकर समाज की रक्षा की और नीलकंठ कहलाए। ठीक उसी प्रकार समाज की विसंगतियों को स्वयं में समाहित कर लोक कल्याण का आदर्श स्थापित करना ही वास्तविक शिवत्व है।"
सीएम योगी ने कहा कि जीवन में सफलता और सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र 'स्थिरता' है। जब हम दोनों पूज्य गुरुदेवों के जीवन चरित्र का अध्ययन करते हैं, तो हमें विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न होने की प्रेरणा मिलती है। गोरक्षपीठ की इसी सर्वग्राही परंपरा और जनसेवा के भाव के कारण देश भर में इस पीठ के प्रति अगाध श्रद्धा है। यही कारण है कि अन्य राज्यों में भी गोरक्षपीठ की नीतियों और योगी आदित्यनाथ के प्रति अपार जनसमर्थन देखा जाता है, जैसा कि हाल ही में मध्यप्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मंदिर निर्माण की घोषणा और भूमिपूजन के उत्साह में देखने को मिला।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक समरसता
मुख्यमंत्री ने पूज्य संतों के शैक्षिक व सामाजिक योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी का स्पष्ट मानना था कि स्वतंत्र भारत में शिक्षा गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक होनी चाहिए। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी ने शिक्षा को स्वावलंबन और 'स्किलिंग' (कौशल विकास) से जोड़ा। उन्होंने निर्धन छात्रों के लिए हॉस्टल, प्रताप आश्रम और खेल छात्रवृत्ति की व्यवस्था की।
सामाजिक एकजुटता के लिए सहभोज अभियान
समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने 'सहभोज अभियान' की शुरुआत की थी। सीएम योगी ने बताया कि यह अभियान हिंदू समाज की बिखरी हुई ताकत को एकसूत्र में पिरोने का एक क्रांतिकारी प्रयास था। श्रीराम मंदिर गोरक्षपीठ संतों का योगदान केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सामाजिक समरसता और शैक्षिक जागरण को भी राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया।
संतों और गणमान्य महानुभावों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान देश भर से आए प्रमुख पीठों के पूज्य संतों और विचारकों ने ब्रह्मलीन महंतद्वय के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला:
- महंत बालकनाथ (विधायक एवं महंत, मस्तनाथ पीठ): उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध कराती है। योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का विकास बिना किसी भेदभाव के देश-दुनिया में मिसाल बन रहा है।
- जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य जी महाराज: उन्होंने महंत अवेद्यनाथ जी को दिव्यदर्शी संत बताते हुए कहा कि अयोध्या आंदोलन में उनका योगदान युगों-युगों तक याद रखा जाएगा।
- स्वामी विद्या चैतन्य जी (नैमिषारण्य): उन्होंने कहा कि गोरक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण में गोरक्षपीठ सदैव अग्रणी रही है।
- महंत राजूदास (हनुमानगढ़ी, अयोध्या): उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण महंत अवेद्यनाथ जी का जीवन मिशन था, जो आज योगी जी के कुशल नेतृत्व में भव्य रूप ले चुका है।
धार्मिक और सामाजिक मंचों पर राम मंदिर न्यास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर उठने वाले प्रश्नों पर भी संतों ने विचार व्यक्त किए। विगत दिनों राम मंदिर ट्रस्ट की प्रक्रियाओं एवं विभिन्न पक्षों द्वारा उठाई गई जांच की मांगों के बीच संतों ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर की पवित्रता और गोरक्षपीठ का संकल्प निष्कलंक है। इस संदर्भ में सनातन संस्कृति पर आघात करने वालों पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं।
पुस्तक विमोचन एवं विविध अनुष्ठान
श्रद्धांजलि सभा के इस पावन अवसर पर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त सचिव रामजन्म सिंह द्वारा रचित पुस्तक 'रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु' का भव्य विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं मंचासीन जगद्गुरुओं व पूज्य संतों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और श्रद्धांजलि गीत से हुआ। इसके पश्चात वैदिक मंगलाचरण, गोरक्षाष्टक पाठ तथा महंत अवेद्यनाथ स्तोत्र पाठ का सस्वर गायन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, सांसद विजय दूबे, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विधायकगण तथा व्यापारिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भारी संख्या में उपस्थित रहे।
निष्कर्ष: राष्ट्रधर्म और समाज कल्याण की अमर प्रेरणा
संक्षेप में कहें तो, श्रीराम मंदिर गोरक्षपीठ संतों का योगदान भारत की भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने धर्म को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखकर उसे राष्ट्रसेवा, शिक्षा और सामाजिक समरसता से जोड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में आज गोरक्षपीठ की यह महान परंपरा न केवल संरक्षित हो रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास और सनातन संस्कृति के वैश्विक पुनरुत्थान के रूप में नई ऊंचाइयों को छू रही है।
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