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यूपी पुलिस राष्ट्रपति वीरता पदक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 वीर जवानों को किया सम्मानित, शहीद की पत्नी को भी मिला सम्मान

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 | 01:22 PM

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यूपी पुलिस राष्ट्रपति वीरता पदक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 वीर जवानों को किया सम्मानित, शहीद की पत्नी को भी मिला सम्मान
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राजधानी लखनऊ में आयोजित एक गरिमामयी और प्रेरणादायक समारोह में उत्तर प्रदेश पुलिस के वीर जवानों के अदम्य साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्रव्यापी सराहना मिली, जहां यूपी पुलिस राष्ट्रपति वीरता पदक से जुड़े भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान संपूर्ण उत्तर प्रदेश पुलिस बल के लिए यह क्षण गौरवशाली और ऐतिहासिक साबित हुआ, क्योंकि राज्य के विभिन्न जनपदों और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के जाबांजों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कानून व्यवस्था बनाए रखने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। समारोह में पुलिस अधिकारियों और जवानों के परिजनों ने भी शिरकत की, जिससे पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति और गर्व से ओतप्रोत नजर आया। राज्य के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इन दिनों कई बड़े घटनाक्रम चल रहे हैं, जैसे कि यूपी चुनाव 2027: प्रतापगढ़ की सियासत में हलचल के बीच प्रशासनिक कसावट और कानून व्यवस्था की मजबूती को सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वीरता सम्मान समारोह का आयोजन

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों ने जिस प्रकार से कठिन परिस्थितियों में अपराधियों के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाकर अपनी वीरता का परिचय दिया है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए गए पदक विजेताओं को एक-एक करके सम्मानित किया। इस प्रतिष्ठित सूची में हरदोई के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा, लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस उपायुक्त डॉ. दीक्षा शर्मा, नौवीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद के सेनानायक निपुण अग्रवाल और गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस उपायुक्त स्वतंत्र कुमार सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इन अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बलों ने अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने का उल्लेखनीय कार्य किया है। इसके साथ ही, प्रशासनिक मोर्चे पर सरकार विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर विकास कार्य कर रही है, जिसकी गवाही सीएम योगी के नेतृत्व में शिखर पर पहुंचा गन्ना व चीनी उद्योग, राष्ट्रीय स्तर पर यूपी की 08 सहकारी मिलें सम्मानित जैसी उपलब्धियां देती हैं, जो यह दर्शाती हैं कि राज्य का प्रशासन सुरक्षा और विकास दोनों ही पायदानों पर लगातार नए आयाम गढ़ रहा है।

शहीद निरीक्षक सुनील कुमार के सर्वोच्च बलिदान को नमन

इस अत्यंत भावनात्मक और संवेदनात्मक अवसर पर पुलिस सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसटीएफ के शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी मुनेश देवी को अपने हाथों से नगद धनराशि और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि निरीक्षक सुनील कुमार ने बीती बीस जनवरी को शामली के झिंझाना क्षेत्र में एक भीषण मुठभेड़ के दौरान चार कुख्यात अपराधियों को मार गिराने में असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया था, और इसी दौरान कर्तव्य पथ पर चलते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की थी। सरकार ने उनके इस अदम्य साहस का सम्मान करते हुए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की भी घोषणा की है। ऐसे मौकों पर जनता के बीच भी यह चर्चा आम हो जाती है कि योगी या अखिलेश... किसे अगला सीएम देखना चाहती है यूपी की जनता? सर्वे ने चौंकाया, लेकिन राज्य की जनता वर्तमान सरकार की सख्त कानून व्यवस्था और पुलिस बलों के मनोबल को बढ़ाने वाले इन ऐतिहासिक कदमों की सराहना खुलकर कर रही है।

सम्मानित होने वाले अन्य वीर पुलिसकर्मियों की सूची एवं योगदान

समारोह के दौरान दो अलग-अलग वर्षों के पदकों की घोषणा और वितरण प्रक्रिया ने पुलिस विभाग के भीतर उत्साह की नई लहर दौड़ाई है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित वीरता पदक पाने वालों में देवदत्त सिंह (आरक्षी, एसटीएफ), राजन कुमार (आरक्षी, एसटीएफ), रितुल कुमार वर्मा (आरक्षी, एसटीएफ), मुन्ने सिंह (उपनिरीक्षक, मेरठ), नीरज कुमार पाल (आरक्षी, गाजियाबाद), कुलदीप कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, संभल), गीतेश कपिल (निरीक्षक, शाहजहांपुर), प्रवीण अहलावत (आरक्षी, सहारनपुर), अमित (निरीक्षक, एसटीएफ), अंगद सिंह यादव (उपनिरीक्षक, एसटीएफ), संदीप कुमार (आरक्षी, गाजियाबाद) और रिपुदमन सिंह (निरीक्षक) जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी कर्मियों ने अलग-अलग अभियानों में अपनी जान जोखिम में डालकर समाज से अपराधियों का सफाया करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। राज्य सरकार की इन नीतियों और पुलिस महकमे के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी नित नए समीकरण बन रहे हैं, जैसा कि हाल ही में विनोद तावड़े बने यूपी बीजेपी के प्रभारी, गुजरात-पंजाब की कमान किसे मिली? की घोषणा के बाद से संगठनात्मक रणनीतियों में भी तेजी आई है।

जनहित में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भविष्य की नीतियां

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में कानून के राज को सर्वोपरि रखते हुए पुलिस बल के आधुनिकीकरण और उनके कल्याण के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। प्राकृतिक आपदाओं से लेकर गंभीर आपराधिक वारदातों से निपटने के लिए राज्य का पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मुस्तैद रहता है, ठीक उसी प्रकार जैसे गंगा-यमुना समेत कई नदियां उफान पर, यूपी के दर्जनों जिले अलर्ट पर। जानें कानपुर से वाराणसी तक बाढ़ राहत शिविर, लाइफ जैकेट और राहत किट की पूरी तैयारी। के तहत सरकार हर आपात स्थिति से निपटने के लिए पूर्व तैयारी रखती है। इसके अलावा, समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिन पर यूपी में महिलाओं को आर्थिक मदद देने की योजना को लेकर भाजपा-सपा में सियासी बहस जैसी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलती हैं, परंतु कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सभी दल इन वीर पुलिसकर्मियों के शौर्य का लोहा मानते हैं।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः, उत्तर प्रदेश पुलिस के इन 16 वीर जवानों को राष्ट्रपति वीरता पदक से नवाजा जाना और शहीद परिवार को सम्मानित किया जाना यह साबित करता है कि सरकार अपने कर्तव्यनिष्ठ सैनिकों और पुलिसकर्मियों की पीठ थपथपाने में कभी पीछे नहीं हटती। यह सम्मान न केवल उन पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाएगा जो दिन-रात प्रदेश की सुरक्षा में तैनात हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और अन्य पुलिस बल के जवानों को भी राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करेगा। 'देश की पत्रिका' का यह मानना है कि एक सुरक्षित और भयमुक्त उत्तर प्रदेश ही सशक्त राष्ट्र की नींव है, और हमारे वीर पुलिसकर्मी इसी नींव के मजबूत स्तंभ हैं।

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।