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दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता की बढ़ीं मुश्किलें, हनुमान जी पर टिप्पणी मामले में कोर्ट ने मांगी पुलिस रिपोर्ट

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 | 01:30 PM

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दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता की बढ़ीं मुश्किलें, हनुमान जी पर टिप्पणी मामले में कोर्ट ने मांगी पुलिस रिपोर्ट
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आईं। एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों की तुलना भगवान हनुमान से करने और कथित रूप से विवादित वक्तव्य देने के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश जारी कर इस पूरे प्रकरण में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता राम निवास शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की अगली तारीख 15 अक्टूबर 2025 निर्धारित की है।

सार्वजनिक मंच से टिप्पणी और विवाद की पृष्ठभूमि

यह संपूर्ण मामला 23 सितंबर 2025 का है, जब दिल्ली से उत्तर प्रदेश के बड़ौत के लिए अंतरराज्यीय डीटीसी बस सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया जा रहा था। इस सार्वजनिक समारोह में सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ भारी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली का उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों की तुलना हनुमान जी से करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी हनुमान जी के समान हैं, जिन्हें अपनी विशाल शक्तियों का भान तभी होता है जब उनकी पूंछ में आग लगाई जाती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने मरघट वाले बाबा का संदर्भ भी अपने संबोधन में जोड़ा।

यद्यपि राज्य सरकार द्वारा हाल के दिनों में अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं, जैसे कि श्रमिक सम्मान समारोह में सुरक्षा किटों का वितरण, परंतु इस विशिष्ट टिप्पणी ने एक नया विधिक विवाद खड़ा कर दिया है।

शिकायतकर्ता के तर्क एवं धार्मिक भावनाओं का प्रश्न

शिकायतकर्ता राम निवास शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट का रुख करते हुए मुख्यमंत्री के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी सार्वजनिक मंच से आराध्य देवी-देवताओं का अनुचित संदर्भ देना सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि प्रशासनिक सुस्ती या सक्रियता को दर्शाने के लिए पूज्य हनुमान जी का इस प्रकार का उदाहरण प्रस्तुत करना पूर्णतः अनुचित और अमर्यादित है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका के कारण मुख्यमंत्री चर्चा में रही हैं, चाहे वह डूसू चुनाव परिणाम के अवसर पर बधाई संदेश देना हो या फिर तीज उत्सव के अवसर पर सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी करना। किंतु इस हालिया वक्तव्य ने राजनीतिक और न्यायिक हलकों में बहस छेड़ दी है।

अदालत का निर्देश और दिल्ली पुलिस का रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) अश्वनी पंवार ने याचिका पर प्राथमिक सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा रहा है। विधिक प्रक्रिया के तहत पहले दिल्ली पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को 15 अक्टूबर तक अपनी स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसके पश्चात ही अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर सूचनाओं के सुचारू प्रवाह के लिए सरकार ने हाल ही में मुख्य प्रवक्ता की नियुक्ति संबंधी निर्णय भी लिए हैं, ताकि ऐसे संवेदनशील विषयों पर आधिकारिक पक्ष स्पष्ट रखा जा सके।

न्यायिक प्रक्रिया और भावी संभावनाएं

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 15 अक्टूबर को प्रस्तुत होने वाली पुलिस रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करेगी। यदि पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया धार्मिक भावनाओं को आहत करने या संज्ञेय अपराध के साक्ष्य प्रस्तुत करती है, तो अदालत एफआईआर का आदेश दे सकती है। दूसरी ओर, यदि पुलिस इसे केवल एक प्रशासनिक रूपक या सामान्य वक्तव्य मानती है, तो याचिका खारिज होने की संभावना भी बनी रहेगी। फिलहाल पूरी नजरें 15 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं।

निष्कर्ष

लोकतंत्र में लोकसेवक के भाषण और अभिव्यक्ति की सीमा हमेशा चर्चा का विषय रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इस न्यायिक घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली पुलिस अदालत के समक्ष क्या रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और न्यायपालिका इस पर क्या रुख अपनाती है।

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।