राजस्थान 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करने का ऐतिहासिक फैसला, सप्लीमेंट्री व्यवस्था समाप्त
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 | 02:24 PM
राजस्थान के शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है, जिसके तहत अब राजस्थान 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। इस ऐतिहासिक बदलाव का उद्देश्य छात्रों को अपने अंकों में सुधार करने का एक और अवसर प्रदान करना है ताकि उन्हें एक पूरे साल की बर्बादी से बचाया जा सके। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा लिए गए इस निर्णय से राज्य के लाखों विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से पुरानी सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
ऐतिहासिक निर्णय: सप्लीमेंट्री परीक्षा की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त
राजस्थान सरकार और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दशकों से चली आ रही पारंपरिक पूरक परीक्षा प्रणाली को अलविदा कह दिया है। पुरानी व्यवस्था के तहत, मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों को सप्लीमेंट्री परीक्षा देनी पड़ती थी, जिससे उन पर मानसिक दबाव बना रहता था। इस पुरानी नीति को बदलना ठीक वैसा ही साहसिक कदम है, जैसे हाल ही में दिल्ली सरकार ने खत्म की 20 साल पुरानी B&B पॉलिसी और नए प्रशासनिक ढांचे की नींव रखी। अब राजस्थान में सप्लीमेंट्री परीक्षा की जगह 'सुधारात्मक परीक्षा' (Improvement Exam) का आयोजन किया जाएगा, जो छात्रों को अधिक सकारात्मक और सुधारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगी।
परीक्षा का नया प्रारूप और समय-सारणी
नई नीति के अनुसार, अब वर्ष में दो बार परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी:
- मुख्य परीक्षा: यह परीक्षा हर साल फरवरी-मार्च के महीने में आयोजित की जाएगी। इसमें सभी नियमित और निजी छात्र भाग लेंगे।
- सुधारात्मक परीक्षा: मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद, मई महीने में सुधारात्मक परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।
यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा सुधार है। इस प्रकार, राजस्थान 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित होने से छात्रों को अपनी तैयारी को बेहतर दिशा देने का समय मिलेगा। जिस प्रकार विभिन्न राज्य सरकारें जनहित में कड़े और सुधारात्मक कदम उठा रही हैं, जैसे हाल ही में कानून व्यवस्था के मोर्चे पर यूपी में जीरो टॉलरेंस नीति का असर देखने को मिला है, उसी प्रकार राजस्थान का शिक्षा विभाग भी छात्रों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहा है।
विद्यार्थियों के लिए नए नियम और पात्रता मानदंड
इस नई सुधारात्मक परीक्षा में बैठने के लिए बोर्ड ने कुछ बेहद स्पष्ट और कड़े नियम निर्धारित किए हैं, जिन्हें समझना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक है:
१. अधिकतम तीन विषयों में सुधार का मौका
विद्यार्थियों को अपने अंकों में सुधार करने के लिए अधिकतम 3 विषयों में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। यदि कोई छात्र अपने मुख्य परीक्षा के अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह इन तीन विषयों को चुनकर मई में दोबारा परीक्षा दे सकता है।
२. विषयवार सर्वोत्तम अंकों का चयन
सबसे महत्वपूर्ण और छात्र-अनुकूल नियम यह है कि मुख्य परीक्षा और सुधारात्मक परीक्षा में से जिस भी परीक्षा में छात्र के विषयवार अधिक अंक होंगे, उन्हें ही अंतिम परिणाम (मार्क्सशीट) में जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
३. तीन या अधिक विषयों में फेल होने पर पात्रता नहीं
जो विद्यार्थी मुख्य परीक्षा में 3 या उससे अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण (फेल) हो जाते हैं या परीक्षा में अनुपस्थित (absent) रहते हैं, उन्हें सुधारात्मक परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं होगी। ऐसे छात्रों को अगले वर्ष ही मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होना होगा।
तनाव मुक्त शिक्षा और प्रशासनिक सुधार
इस नई नीति का व्यापक स्वागत किया जा रहा है क्योंकि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। परीक्षा के दिनों में छात्रों पर अत्यधिक दबाव होता है, जिसे कम करने के लिए सरकारें लगातार प्रयासरत हैं। प्रशासनिक स्तर पर सुगमता लाने के लिए यह कदम उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली के कारोबारियों के लिए 'उद्योग मित्र पोर्टल' लॉन्च करना था, जिसने व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाया। इसी प्रकार, शिक्षा के क्षेत्र में यह दोहरी परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी।
दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता की बढ़ीं मुश्किलें, हनुमान जी पर टिप्पणी मामले में कोर्ट ने मांगी पुलिस रिपोर्ट
अगला समाचार →UP ITI 5th Phase Admission 2024: यूपी आईटीआई प्रवेश का पांचवा चरण शुरू, जानें आवेदन की आखिरी तारीख और पूरी प्रक्रिया