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गाजियाबाद: इंदिरापुरम के जयपुरिया मॉल के बाहरी हिस्से में बनी अवैध लिफ्ट, नियमों की उड़ रही धज्जियां

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • बुधवार, 23 सितंबर 2026 | 05:53 PM

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गाजियाबाद: इंदिरापुरम के जयपुरिया मॉल के बाहरी हिस्से में बनी अवैध लिफ्ट, नियमों की उड़ रही धज्जियां
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गाजियाबाद के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों में से एक इंदिरापुरम स्थित जयपुरिया मॉल एक बार फिर नियमों के उल्लंघन और तानाशाही रवैये को लेकर चर्चा में है। मॉल के बाहरी हिस्से में बनाई गई जयपुरिया मॉल इंदिरापुरम अवैध लिफ्ट इन दिनों आम ग्राहकों और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस का विषय बन गई है। आरोप है कि यह लिफ्ट न केवल अवैध रूप से नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई है, बल्कि इसका इस्तेमाल भी केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर वाले सख्त नियमों के बावजूद इस तरह के अवैध निर्माण का धड़ल्ले से जारी रहना प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। दिल्ली एनसीआर सहित पूरे प्रदेश में जब अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान जोरों पर चल रहा है, तब इस प्रकार के मामलों का सामने आना चिंताजनक है। एनसीआर क्षेत्र के अन्य वाणिज्यिक केंद्रों की बात करें, तो हाल ही में बीकानेरवाला ने गुरुग्राम में खोला नया आउटलेट: एलन एपिक मॉल सेक्टर 70 में शानदार शुरुआत की है जहाँ सभी सुरक्षा एवं व्यावसायिक मानकों का कड़ाई से पालन किया गया है, इसके विपरीत जयपुरिया मॉल का यह मामला नियमों की खुली धज्जियां उड़ाता नजर आता है।

बेसमेंट के व्यावसायिक उपयोग और वीआईपी संस्कृति पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि मॉल में बेसमेंट का उपयोग भी वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिससे यह साबित होता है कि यहां के प्रबंधकों को स्थानीय नगर निगम या विकास प्राधिकरण का कोई डर नहीं है। आने वाले ग्राहकों और वहां काम करने वाले अन्य दुकानदारों का गंभीर आरोप है कि मॉल के बाहरी हिस्से में बनी इस अवैध लिफ्ट को मुख्य रूप से प्रथम तल पर स्थित एक विशेष डॉक्टर के क्लिनिक तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस लिफ्ट से मॉल के अन्य मंजिलों या आम ग्राहकों को जाने की सख्त मनाही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब भी कोई सामान्य नागरिक इस लिफ्ट का उपयोग करना चाहता है, तो उसे सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोक दिया जाता है। इस 'वीआईपी ट्रीटमेंट' के कारण मॉल में आने वाले आम ग्राहकों और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी ही प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की मनमानी का एक अन्य मामला हरियाणा में भी सामने आया था, जहाँ कोर्ट आदेश की बेशर्म अवहेलना: नारनौल के सील मॉल पर मालिक का चेतावनी भरा बोर्ड—'2-3 दिन में फिर खुलेगा', नगर परिषद अलर्ट जैसी घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देती हैं। ठीक इसी प्रकार, इंदिरापुरम के इस मॉल में भी नियमों को ताक पर रखकर आम जनता के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

प्रशासनिक सुस्ती और आम जनता का बढ़ता आक्रोश

पीड़ित नागरिकों और दुकानदारों का कहना है कि एक सार्वजनिक मॉल में इस तरह का वीआईपी कल्चर और अवैध कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जहाँ एक तरफ सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर इस तरह के अवैध निर्माण जनता के मन में रोष पैदा कर रहे हैं। राज्य में अगले चुनावों को लेकर भी जनता का रुख स्पष्ट होने लगा है, जैसा कि विभिन्न सर्वेक्षणों और राजनीतिक बहसों में देखा जा सकता है, जिनमें योगी या अखिलेश... किसे अगला सीएम देखना चाहती है यूपी की जनता? सर्वे ने चौंकाया जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। जनता अब विकास और कानून के राज में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या पक्षपात बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और नगर निगम से मांग की है कि इस अवैध लिफ्ट के खिलाफ तत्काल प्रभाव से सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए और इसे तुरंत सील या ध्वस्त किया जाए।

जनहित में जरूरी निर्देश एवं उपाय

इस प्रकार के अवैध निर्माणों के खिलाफ नागरिकों को जागरूक होने की आवश्यकता है। यदि आपके आसपास भी किसी मॉल, सोसाइटी या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा या नियमों के विरुद्ध निर्माण किया जा रहा है, तो इसकी शिकायत तुरंत संबंधित विकास प्राधिकरण या नगर निगम के पोर्टल पर दर्ज कराएं। प्रशासन को भी चाहिए कि वह समय-समय पर औचक निरीक्षण करे ताकि इस प्रकार के अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद न हो सकें। जनहित और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए ऐसी अवैध संरचनाओं के विरुद्ध बिना किसी राजनीतिक दबाव के त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि शहर में कानून का राज स्थापित रह सके।

निष्कर्ष

इंदिरापुरम के जयपुरिया मॉल में बनी यह अवैध लिफ्ट केवल एक निर्माण का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी में ढिलाई और व्यावसायिक मनमानी का एक स्पष्ट उदाहरण है। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आम जनता के अधिकारों का हनन होता रहेगा। 'देश की पत्रिका' इस खबर पर लगातार पैनी नजर बनाए रखेगी और प्रशासन की अगली कार्रवाई से पाठकों को अवगत कराती रहेगी।

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।