दिल्ली यमुना घाट सफाई अभियान: सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व में 70 घाटों पर उतरा जनसैलाब, भाजपा नेताओं ने किया श्रमदान
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | 01:21 PM
राजधानी दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के उद्देश्य से आयोजित व्यापक दिल्ली यमुना घाट सफाई अभियान के तहत रविवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्रियों और दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं ने एकजुट होकर बड़े पैमाने पर श्रमदान किया। 'चलो यमुना अभियान' के अंतर्गत आयोजित इस महा-अभियान में दिल्ली के कुल 70 घाटों पर एक साथ सफाई कार्य संचालित किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और मां यमुना के प्रति अपनी श्रद्धा को सेवा में बदलने की एक मिसाल कायम की।
आईटीओ स्थित हाथी घाट से अभियान की भव्य शुरुआत
अभियान का मुख्य केंद्र आईटीओ स्थित प्रसिद्ध हाथी घाट रहा, जहाँ स्वयं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कचरा हटाकर सफाई कार्य की शुरुआत की। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के मुख्य सचेतक एवं स्थानीय विधायक अभय वर्मा, दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, कैबिनेट मंत्रियों, तथा पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने श्रमदान में भाग लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि 'चलो यमुना अभियान' के अंतर्गत आईटीओ स्थित हाथी घाट पर स्वच्छता अभियान में सेवा देना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
यह पहल केवल नदियों की स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूर्व राज्य सरकार ने शहर के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए दिल्ली डार्क स्पॉट स्मार्ट लाइट योजना के माध्यम से शहर की सुरक्षा और सुंदरता का संकल्प भी दोहराया था। उसी कड़ी में अब नदियों और घाटों के कायाकल्प पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
70 घाटों पर दिखा जनभागीदारी का अभूतपूर्व उत्साह
राजधानी के 70 अलग-अलग यमुना घाटों पर रविवार सुबह से ही जनसैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न सामाजिक संगठनों, विद्यार्थी वर्गों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और धार्मिक संस्थाओं ने सफाई उपकरणों के साथ घाटों से प्लास्टिक, सड़े-गले अवशेष और अन्य ठोस कचरे को हटाकर स्वच्छता सुनिश्चित की।
इस विशाल दिल्ली यमुना घाट सफाई अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ मिलती है, तो बड़े से बड़े सामाजिक परिवर्तन संभव हो जाते हैं। घाटों पर मौजूद लोगों ने न केवल कचरा उठाया, बल्कि आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और नागरिकों को जागरूक भी किया।
नागरिकों से अपील: घाटों की स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प
अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों से भावुक और जिम्मेदार अपील की। उन्होंने कहा कि मां यमुना को उनका निर्मल और प्राचीन स्वरूप लौटाना केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि यह हर दिल्लीवासी का नैतिक कर्तव्य भी है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि लोग यमुना के घाटों और किनारों पर प्लास्टिक की थैलियाँ, पूजा सामग्री, और गृह कचरा न फेंकें।
स्वच्छता बनाए रखने हेतु मुख्य दिशा-निर्देश:
- प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध: घाटों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह से वर्जित करें।
- पूजा सामग्री का निस्तारण: धार्मिक अवशेषों और पूजा सामग्री को नदी में प्रवाहित करने के बजाय सरकार द्वारा बनाए गए समर्पित कलशों या गड्ढों में ही डालें।
- जागरूकता का प्रसार: अपने आसपास के लोगों को घाटों को गंदा न करने के लिए प्रेरित करें और दूसरों के सामने मिसाल पेश करें।
राजनीतिक हलचलों और प्रशासनिक चुनौतियों के बीच, जहाँ हाल ही में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष पर भड़कीं सीएम रेखा ने सख्त रुख अपनाया था, वहीं इस नागरिक केंद्रित स्वच्छता अभियान के माध्यम से सरकार ने धरातल पर काम करने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता जाहिर की है।
भविष्य की कार्ययोजना और दीर्घकालिक प्रभाव
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिल्ली यमुना घाट सफाई अभियान को निरंतरता दी जाती है और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) के कार्य को तेजी से पूरा किया जाता है, तो यमुना के जल स्तर और गुणवत्ता में तेजी से सुधार देखा जा सकता है। सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि घाटों की नियमित निगरानी और सफाई के लिए वालंटियर्स की एक विशेष टीम गठित की जाएगी जो लगातार स्थिति पर नजर रखेगी।