UP Encounter 303 Criminals Killed: यूपी में जीरो टॉलरेंस नीति का दिखा असर, 9 सालों में 303 अपराधी ढेर
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 | 12:55 PM
UP Encounter 303 Criminals Killed: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अपराधियों और माफियाओं के विरुद्ध चलाई जा रही 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की नीति का व्यापक असर अब धरातल पर नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते नौ वर्षों में प्रदेश में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक कार्रवाई की गई है। इस अवधि में पुलिस के साथ हुई साहसिक मुठभेड़ों में अब तक 303 कुख्यात अपराधी ढेर किए जा चुके हैं, जबकि हजारों की संख्या में इनामी और संगठित अपराधी सलाखों के पीछे भेजे गए हैं। पुलिस महकमे के इस शौर्य और समर्पण को राज्य स्तर पर लगातार सराहा जा रहा है, जहाँ हाल ही में यूपी पुलिस राष्ट्रपति वीरता पदक से 16 वीर जवानों को किया सम्मानित गया था।
मुठभेड़ों और कठोर वैधानिक कार्रवाइयों के आंकड़े
राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, बीते नौ वर्षों के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए हैं, जबकि 12,202 अपराधी घायल हुए हैं। इन अभियानों के दौरान सतर्क पुलिस बल ने 23,601 ऐसे अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है, जिन पर पुलिस की ओर से इनाम घोषित था। संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिए चलाए गए विशेष अभियानों के तहत गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 87,835 व्यक्तियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की गई है।
इतना ही नहीं, अपराधियों के आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) का व्यापक प्रयोग किया गया है। इसके तहत अब तक 15,233 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त या ध्वस्त की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनने वाले 995 शातिर अपराधियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी सख्त कार्रवाई की गई है। प्रदेश में अपराध नियंत्रण के इस मॉडल पर जनता का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज है, जिसका आकलन योगी या अखिलेश... किसे अगला सीएम देखना चाहती है यूपी की जनता? सर्वे के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
माफिया और संगठित गिरोहों पर बड़ा प्रहार
चिह्नित 68 माफिया गिरोहों पर चौतरफा शिकंजा
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश स्तर पर 68 प्रमुख माफियाओं और उनके गिरोह के सदस्यों को चिह्नित कर उनके खिलाफ अभियान चला रखा है। बीते नौ वर्षों में इन चिह्नित माफियाओं और उनके सहयोगियों के विरुद्ध कुल 909 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 651 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। माफिया तंत्र की आर्थिक रीढ़ तोड़ने से प्रदेश के उन जिलों में सामान्य स्थिति बहाल हुई है, जो कभी बाहुबलियों के प्रभाव क्षेत्र माने जाते थे। इस प्रशासनिक बदलाव का सीधा असर राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर भी पड़ा है, जिससे यूपी चुनाव 2027: प्रतापगढ़ की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
साइबर अपराध नियंत्रण में उत्तर प्रदेश का पहला स्थान
संगठित और पारंपरिक अपराध के साथ-साथ डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने में भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने मिसाल कायम की है। साइबर अपराध पर प्रभावी कार्रवाई करने के मामले में उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में समर्पित साइबर क्राइम थानों का संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, प्रत्येक जनपद के स्थानीय थानों में साइबर सेल और विशेष हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है।
डिजिटल धोखाधड़ी पर तुरंत रोक लगाने के लिए पुलिस तंत्र को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि अगस्त 2019 से जून 2026 की अवधि के दौरान साइबर अपराध से जुड़ी 874.58 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को फ्रीज या होल्ड कराने में सफलता मिली है। साइबर सुरक्षा और पुलिसिंग को हाई-टेक बनाने की दिशा में कई जिलों में अनुकरणीय कार्य हुआ है; उदाहरण के लिए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बढ़ाई गौतमबुद्धनगर पुलिस की तकनीकी क्षमता, जिससे साइबर अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी है।
कानून-व्यवस्था का सुशासन और औद्योगिक विकास से संबंध
उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के प्रति अपनाई गई सख्त नीति केवल कानून-व्यवस्था सुधारने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने राज्य में व्यापारिक और औद्योगिक निवेश का माहौल भी तैयार किया है। सुरक्षित वातावरण बनने से राज्य के कृषि और उद्योग क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है। इसका एक प्रमुख उदाहरण यह है कि सीएम योगी के नेतृत्व में शिखर पर पहुंचा गन्ना व चीनी उद्योग और इसे राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
प्रशासनिक कठोरता और बुनियादी ढांचे के विकास के मामले में उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक अध्ययन का विषय बन गया है। जहाँ एक तरफ अन्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपनी पुरानी नीतियों में फेरबदल कर रहे हैं—जैसे कि हाल ही में दिल्ली सरकार ने खत्म की 20 साल पुरानी B&B पॉलिसी—वहीं उत्तर प्रदेश अपनी सख्त पुलिसिंग और प्रशासनिक अनुशासन के बल पर नई नीतियां लागू कर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः, उत्तर प्रदेश सरकार के नौ वर्षों के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि राज्य में जीरो टॉलरेंस की नीति केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर लागू की गई एक रणनीतिक व्यवस्था है। एनकाउंटर में 303 अपराधियों का ढेर होना, अरबों रुपये की माफिया संपत्ति का सीजर और साइबर अपराध में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानून-व्यवस्था का नया मानक स्थापित किया है। सरकार का यह सख्त रवैया न केवल आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है, बल्कि राज्य के समग्र विकास की राह भी आसान बना रहा है।
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